Jivan

कभी अपनी नज़र से भी खुद को तौलो,

कब तक दूसरों को आईना बनाओगे?


जब जीवन में कुछ चाहत थी,

तब हाथों में कुछ पाया नहीं।

आज जब पासक्ते हैं,

कुछ चाहत बची नहीं।


मासूम थे हम उस दौर में,

अब मासूमियत तलाशते हैं दूसरों की शोर में ।

चलो, कुछ नहीं, और क्या सही,

अगले जन्म में फिर से जी लेंगे वही ।